Thursday, 14 April 2011

भरीपूरी प्यास....! - 2

कितनी अजीब बात है, हम एक-दूसरे की धड़कन की आवाज तक को चाहे पहचानते हो, लेकिन अहसासों के लिए हमें कहे हुए शब्दों पर ही भरोसा करना होता है और शब्द... उनकी भी तो सीमा है... गूँगे का गुड़... तुम्हीं से सुना था। उस दिन तो तेज धूप थीं, तुमने कहा था कि बारिश के दिनों में क्वांर जैसी तीखी धूप... सचमुच धरती गर्म हो रही है। हम बस स्टॉप पर खड़े थे, कैसा इत्तफाक था कि बस स्टॉप पर हम दोनों ही थे। बहुत देर से बस का इंतजार कर रहे थे, लेकिन कोई बस नहीं आ रही थी, वो तो बहुत देर बाद पता चला था कि शहर में कहीं बस-ऑपरेटरों और प्रशासन के बीच कुछ तनातनी हुई है, इसलिए तुरंत बसें चलना बंद हो गई थीं। तो एकाएक तेज अँधड़ चला और तीखी-जलाती धूप की जगह काले-भँवर बादल आकर बरसने लगे थे। तेज-तिरछी बौछारें बस स्टॉप के अंदर आकर हमें भिगो रही थी, एकाएक तुम स्टॉप से निकलकर खुले में पहुँच गई, मैं तुम्हें भीगते देख रहा था। गहरे बैंगनी रंग के कपड़े पहने हुए थे तुमने और एकाएक तुमने अपना हाथ मेरी ओर बढ़ाया था... मेरे अंदर मीठी-सिहरन दौड़ गई थी, मैंने तुम्हारा हाथ थाम लिया था और मैं भी तुम्हारे साथ भीगने लगा था... ये तो बहुत बाद में समझ में आया था कि तुम बहुत तरल हो, पानी की तरह, बिना किसी ग्रंथि के... बहती हुई। मेरे लिए तो दावत थी, लेकिन तुम्हारे लिए तो मात्र दाल-भात...। मेरी जगह कोई ओर भी होता, तब भी तुमने यही किया होता। जब हम फिर से बस स्टॉप पर आए थे तो तुमने कहा था… बारिश में भीगना... क्या सुख है, कितना... जैसे गूँगे का गुड़... बता ही नहीं पाए कि मीठा है औऱ कितना... !
हे भगवान, अब... तुम्हारी याद से ही नशा होने लगा है लूनी... ओह... तन्मय की आँखें भारी हो गई थी और उसने सीट पर ही खुद को स्ट्रेच कर आँखें मूँद ली थी। रेडियो चल ही रहा था... तेरा ना होना जाने... क्यूँ होना ही है, ना है ये पाना, ना खोना ही है...। मूँदी आँखों में पानी भर आया था, क्या सचमुच? तुमने ऐसी जिद्द क्यों की यार...? क्या बुरा होता यदि हम दोनों ही इस समय साथ होकर ये सुनते, महसूस करते... ? यूँ है तो सब कुछ, और सच पूछो तो ऐसी कोई खराश भी हर वक्त महसूस नहीं होती है, लेकिन जब होती है तो फिर सहने की सीमा के आखिरी सिरे पर होती है, बहुत कुछ तोड़-फोड़ कर देने का मन करता है और सबसे पहले गुस्सा तुम पर आता है.... क्यों किया ऐसा? क्यों.... क्यों?
क्रमशः